अटल बिहारी वाजपेई की जीवनी, परिचय,हिंदी -Biography of Atal Bihari Vajpayee and Early Life in Hindi

अटल बिहारी वाजपेई की जीवनी, परिचय,हिंदी -Biography of Atal Bihari Vajpayee and Early Life in Hindi

पुरस्कार और सम्मान

(1)1992 में देश की अभूतपूर्व सेवाओं के लिए “पद्म विभूषण ” सम्मान ।
(2)1993 ,कानपुर यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि का सम्मान।
(3)1994 , लोकमान्य तिलक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
(4)1994 ,पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार से नवाजा गया।
(5)1994, सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान।
(6)2015,देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार”भारत रत्न” से नवाजा ।
(7)2015,बांग्लादेश द्वारा “लिब्रेशन वार अवॉर्ड ” दिया गया ।

अटल बिहारी वाजपेई जीवन भर राजनीति में सक्रिय रहे । पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद एकमात्र ऐसे नेता रहे जिन्होंने लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद संभाला ।वे भारत के सबसे प्रेरक और सम्माननीय राजनीतिज्ञो में से एक रहे ।अटल जी ने विभिन्न परिषदों और संगठनों के मेंबर के तौर पर अपनी भूमिका निभाते हुए सेवाएं दी।अटल जी प्रखर वक्ता और प्रभावशाली कवि थे ।एक बड़े नेता के तौर पर वे अपनी लोकतांत्रिक, साफ़ छवि और उदार विचारों के लिए जाने गए।अटल जी को 2015 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान”भारत रत्न” से नवाजा गया ।

प्रारंभिक जीवन

25 दिसंबर 1924 को अटलजी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ ।वे सात भाई – बहन थे उनकी माता का नाम कृष्णा देवी और पिता का कृष्ण बिहारी था ।उनके पिता विद्वान और स्कूल शिक्षक थे अटल जी अपनी स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद लक्ष्मीबाई कॉलेज  और डी. ए.वी  कॉलेज कानपुर आ गए ।यहां से इन्होंने इकोनॉमिक्स सबजेक्ट में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। उन्होंने लखनऊ से आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन भरा लेकिन पढ़ाई जारी नहीं कर पाए ।बाद में इन्होंने बतौर संपादक आरएसएस द्वारा प्रकाशित पत्रिका में नौकरी की । हालांकि अटल जी ताउम्र अविवाहित रहे ।उन्होंने बी एन कौल की दो बेटियों नंदिता और नमिता को गोद लिया ।

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करियर

अटल जी ने स्वतंत्रता सेनानी के रूप में अपनी  राजनैतिक यात्रा का शुभारंभ किया ।भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लेने पर 1942 में अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार कर लिए गए।श्यामा प्रसाद मुखर्जी से पहली मुलाकात उनकी इसी दौरान हुए ।जो बी जे एस के नेता यानी भारतीय जनसंघ के नेता थे।अटल जी ने उनके राजनैतिक एजेंडे में सहयोग दिया । स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते मुखर्जी का निधन हो  गया ।बाद में बी जे एस का कार्यकाल अटल जी के कंधों पर आ गया और इस संगठन के एजेंडे और विचारों को आगे बढ़ाया ।लोकसभा चुनावों में बलरामपुर सीट से1954 में संसद सदस्य निर्वाचित हुए । विस्तृत नजरिए और राजनीतिक जानकारी ने उन्हें छोटी उम्र में राजनीति जगत में सम्मान और पहचान दिलाने में मदद की। जब मोरारजी देसाई की सरकार 1977 में बनी तो अटल जी को विदेश मंत्री का पद दिया गया । दो साल बाद अटल जी ने चीन की यात्रा की ।यात्रा का मकसद चीन सम्बन्धों पर चर्चा करना था।1971 में भारत- पाक के युद्ध के कारण प्रभावित व्यापारिक संबंधों को सुधारने के लिए पाकिस्तान की भी यात्रा की। आरएसएस पर जब जनता पार्टी ने हमला किया तब अटल जी ने 1979 में मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया ।

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अटल जी व आरएसएस से आए लाल कृष्ण आडवाणी तथा बीजेएस और भैरों सिंह शेखावत व अन्य साथियों ने सन् 1980 में भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी । पहले पांच साल “स्थापना के” अटल जी खुद बीजेपी के अध्यक्ष रहे ।।
भारत में प्रधानमंत्री के तौर पर
लोकसभा चुनाव के बाद सन 1996 में बीजेपी को सत्ता में आने का मौका मिला और अटल जी प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त हुए ।लेकिन कुछ दिनों में ही बहुमत सिद्ध न कर पाने पर सरकार गिर गई और अटल जी को मात्र 13 दिनों के अंदर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा ।
एक बार फिर बीजेपी 1998 में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने पर सरकार बनाने में कामयाब रही।लेकिन इस बार सरकार तेरह महीनों तक चल सकी।क्यूंकि अपना समर्थन वापिस लेते हुए आॅल इंडिया द्रविड़ मुनेन काजगम पार्टी ने सरकार गिरा दी।अटल जी के योगदान और नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने  राजस्थान के पोखरण में मई 1998 में परमाणु परीक्षण कराए।
एनडीए(नेशनल डेमक्रेटिक एलायंस ) को 1999 लोकसभा चुनाव में सरकार बनाने की सफलता प्राप्त हुई और अटल जी एक बार फिर प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त हुए ।इस बार पूरे पांच साल पूरे करने पर एनडीए पार्टी  पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी ।अटल जी ने निजी   क्षेत्र और आर्थिक सुधार के लिए सहयोगी दलों के मजबूत समर्थन से कई योजनाएं शुरू की। औद्योगिक क्षेत्र में अटल जी ने राज्यों के दख़ल को सीमित करने का प्रयास किया ।सूचना तकनीकी और विदेशी निवेश की दिशा में अटल जी ने शोध को बढ़ावा दिया ।भारत की अर्थव्यवस्था पर अटल जी ने नई नीतियों और विचारों के परिणाम स्वरूप त्वरित विकास हासिल किया । यू एस ए और पाक के साथ दोस्ताना व्यवहार कायम करके अपनी सरकार में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया ।हालांकि विदेश नीतियों पर अटल जी की सरकार ज्यादा बदलाव नहीं ला सकी लेकिन फिर भी इन नीतियों की सराहना हुई।
एनडीए के पूरे पांच साल होने के बाद पूरे आत्मविश्वास के साथ अटल जी के नेतृत्व में लोकसभा चुनावों में बीजेपी एक बार फिर चुनाव में उतरी लेकिन इस बार यूपीए (कांग्रेस) ने सफलापूर्वक अपनी सरकार बनाई ।
और इसके साथ ही अटल जी ने सक्रिय राजनीति से दिसंबर 2005 में संन्यास लेने की घोषणा कर दी।
व्यक्तिगत जीवन
अटलजी समस्त जीवन में अविवाहित रहे और उन्होंने बी एन कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को गोद लिया था ।

मृत्यु
अटल जी एक बार 2009 में दिल का दौरा पड़ने से जूझ चुके थे जिसके बाद उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता रहा । ग्यारह जून 2018 को उन्हें एम्स (अखिल भारतीय आयु्विज्ञान संस्थान) में भर्ती किया गया था । सोलह अगस्त 2018 को अटलजी परलोक सिधार गए । सत्रह अगस्त को उनकी मुंह बोली बेटी नमिता कौल ने उन्हें मुखाग्नि दी।राजघाट के नजदीक शांति वन में स्मृति स्थल में उनकी समाधि बनाई गई हैं।

जीवन घटनाक्रम (टाइमलाइन)
1924 * अटल जी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हुआ ।
1942 *भारत छोड़ो आन्दोलन में भागीदारी ।
1957 *लोकसभा सीट के लिए चुने गए ।
1980 *बीजेपी की स्थापना ।
1992 *पद्म विभूषण सम्मान।
1996 * प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त।
1998 *दूसरी बार प्रधानमंत्री पद पर कार्यरत।
1999 *तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने।
2005 *राजनीति से सन्यास ।
2015 *भारत रत्न से सम्मानित।
2108 *11 जून ,2018 , मृत्यु

अटल जी का कविता सग्रह से दिखाई गई एक कविता

अरूण कुमार
Source: Kavita sangrah

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