एम करुणानिधि जीवन परिचय, राजनीतिक और लेखन जीवन , हिंदी में – M Karunanidhi biography in Hindi

एम करुणानिधि जीवन परिचय, राजनीतिक और लेखन जीवन , हिंदी में – M Karunanidhi biography in Hindi

जन्म 3 जून 1924
निधन 7 अगस्त 2018

भारतीय राजनीति के लम्बे सफ़र तय करने वाले राजनेता मुतुवेल करुणानिधि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री थे ।वे द्रविड़ मुनेन कड़गम राजनीतिक दल के प्रमुख नेता थे । सी एन अनादुरई के मौत के बाद सन् 1969 में डी. एम. के. नेता बने थे ।और वहां के लगातार पांच बार मुख्यमंत्री रहे ।उनका मुख्य रूप से 60 साल के राजनीतिक करियर के चुनावी भागीदारी में जीत दर्ज करने का रिकॉर्ड रहा । डी. एम. के. के नेतृत्व में उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु और पदुचेरी में डी, एम, के, के नेतृत्व में 40 सीटों पर जीत दर्ज की । इसके बाद लोकसभा के 2009 चुनाव में डी, एम,के, द्वारा जीती गई सीटों की संख्या को 16 से 18 तक पहुंचाया और तमिलनाडु और पदूचेरी में यू, पी, ए के साथ गठबंधन करने पर 28 सीटों पर जीत दर्ज की ।उन्होंने नाटककार और पटकथा लेखक के रूप में तमिल सिनेमा में अपना योगदान दिया ।उनके समर्थक उन्हें “कला का विद्वान “ और कलाईनार के नाम से बुलाते थे । करुणानिधि का निधन कावेरी अस्पताल में 7 अगस्त 2018 को हुआ ।।

अनुक्रम

करुणानिधि का आरम्भिक जीवन
करुणानिधि का पटकथा लेखन
करुणानिधि का राजनीतिक जीवन
करुणानिधि का साहित्य में योगदान
व्यक्तिगत जीवन

करुणानिधि का आरम्भिक जीवन

3 जून 1924 को एम करुणानिधि का जन्म मूतुवेल और अंजुगम के ब्रिटिश भारत के नागपहिनाम के तिरुक्कुभलई में दक्षिणमूर्ति के रूप में हुआ ।उनके परिवार का संबध हिंदी समुदाय से रहा ।

पटकथा लेखन
करुणानिधि का पटकथा लेखन , तमिल फिल्म उद्योग में पटकथा लेखक के रूप करियर की शुरुआत करते हुए हुआ ।इसके साथ अपने भाषण कौशल और तेज बुद्धि के कारण बहुत जल्द एक प्रसिद्ध राजनेता बन गए । द्रविड़ आंदोलन से उनका गहरा जुड़ाव रहा और उसके पश्चात बुद्धिजीवी आदर्शो और समाजवादी सुधार के तौर पर कहानियां लिखने में काफी मशहूर थे । पराशक्ति नामक फिल्म के माध्यम से तमिल सिनेमा में अपने राजनीतिक विचारों का प्रचार करना शुरू किया इस फिल्म के रिलीज होने पर कई प्रतिबंध लगे ।लेकिन इसके बावजूद 1952 में इसे पर्दे पर उतारा गया था और बॉक्स ऑफिस पर अपना गहरा रंग छोड़ने में सफल रही। इस फिल्म ने द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा का पूरे तरीके से समर्थन किया ।और दो अभिनेताओं एस, एस, राजेंद्र और शिवाजी गणेशन को दुनिया के सामने परिचित करवाया ।ये फिल्में कुछ रूढ़िवादी सोच से भी घिरी क्योंकि इसमें ब्रहामण वर्ग की आलोचना भी की गई थी ।इसके साथ उनकी दो अन्य फ़िल्म थांगर्थानम और पनाम थी ।जिनका आधार आत्मसम्मान विवाह , विधवा पुनर्विवाह , जमींदारी का उन्मूलन और जो धार्मिक पाखंड इत्यादि शामिल था उनके सामाजिक मुद्दों पर लोकप्रिय नाटक और फिल्में अत्यधिक रूप से सेंसरशिप के आगे हार भी गई इसके चलते उनके दो नाटक 1950 में प्रतिबंधित कर दिए गए थे ।।

राजनीति में प्रवेश
14 साल की उम्र में राजनीति में प्रवेश किया और जस्टिस पार्टी के अलगीरिस्वामी के एक भाषण से प्रेरित होकर करुणानिधि ने हिंदी विरोधी आंदोलन में भाग लिया ।उन्होंने स्थानीय युवाओं के साथ अपने इलाके में एक संगठन की स्थापना भी की।इसके बाद उन्होंने एक छात्र संगठन तमिलनाडू तमिल मनावर मंद्रम के नाम से बनाया ।जो द्रविड़ आंदोलन का पहला छात्र विंग था ।और इन सभी छात्रों और युवाओं को समाजिक कार्य में शामिल कर लिया ।
करुणानिधि का राजनीति में अपना हाथ मजबूत करने के लिए अका कल्लाकुड़ी में हिंदी विरोधी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अहम रूप से प्रमुख कारण रहा था।
करुणानिधि ने हिंदी विरोध प्रदर्शन में रेलवे स्टेशन से हिंदी नाम मिटा दिया था और रेलगाड़ियों के रास्ते रोककर पटरी पर लेट गए थे ।इस विरोध प्रदर्शन के चलते दो लोग मौत के घाट उतर गए थे और। करुणानिधि को गिरफ्तार कर लिया गया था ।

सत्ता प्राप्ति
करुणानिधि 1957 में तमिलनाडु विधानसभा तिरुचिरापल्ली ज़िले के कुलिथलाई से पहली बार चुने गए ।अपने लंबे करियर के दौरान तमिलनाडु राजनीतिक क्षेत्र से पार्टी और सरकार में विभिन्न कार्य पदों पर नियुक्त रह चुके है।
प्रमुख प्रतिद्वंदी जे, जयललिता के हारने के बाद मई 2006 के चुनाव में 13 मई 2006 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का पद संभाला ।

साहित्य
तमिल साहित्य में करुणानिधि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।उनके खाते में पटकथाएं , चिट्ठियां, उपन्यास, कविताएं, जीवनी, ऐतिहासिक उपन्यास, संवाद, मंच नाटक , गाने शामिल हैं।

पुस्तकें
करुणानिधि की प्रमुख पुस्तकें है – तेनपंडी सिंगम , नेजुक निदी , संग तमिल, पोत्रेर, इत्यादि उनकी गद्य व पद्य की पुस्तकें लगभग सौ से भी अधिक हैं।

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी पढ़े।

मंचकला
करुणानिधि के नाटक जैसे ओरे रदम, पालानी अप्पन तुक्कु मेडई , कागी दप्पु , मनिमागुदाम इत्यादि हैं।

पटकथाएं
जुपिटर पिक्चर्स के लिए 20 वर्ष की उम्र में करुणानिधि ने पटकथा लिखना शुरू किया ।अपनी पहली फिल्म “राजकुमारी” से अपनी लोकप्रियता बनाई । पटकथा लेखन के हूंनर सुधार आता गया और लिखते लिखते उन्होंने 75 पटकथाएं लिख डाली हैं।जिसमें से कुछ के नाम अबिमन्यू , मंदिरी कुमारी , मनागमन, देवकी, पड़ाद थेनिक्कल, युलियिन , इत्यादि।

गौतम बुद्ध की जीवनी पढ़े ।

संपादक और प्रकाशक के रूप में कार्य
बचपन में ही उन्होंने मुरासोली नामक एक मासिक अखबार के संस्थापक और संपादक के रूप में कार्य किया।10 अगस्त 1942 को मुरासोली का आरंभ किया। जो बाद में साप्ताहिक और अब दैनिक अखबार बन गया है।


व्यक्तिगत जीवन
करुणानिधि पहले मांसाहारी थे लेकिन बाद में शाकाहारी बन गए वे कहते थे कि उनकी स्फूर्ति और सफलता का कारण उनका दैनिक रूप से योगाभ्यास करना था ।उनकी तीन बार शादी हुए ।पहली पत्नी पद्मावती ,दूसरी दयालु आम्माल और तीसरी राजातियम्माल थी ।

करुणानिधि की वीडियो में बायोग्राफी देखने के लिए क्लिक करें।

प्रिय पाठक,अगर आपका इस लेख से संबधित कोई सुझाव या विचार हमारे लिए हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें ।

Author: ARUN SANDHU

Blogger...I am Post Graduate in Mass Communication from Punjabi University Patiala and Blog is my Passion .....Always Helping Hands .......

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