पंडित जवाहरलाल नेहरु का जीवन परिचय,जीवनी,हिंदी, Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi

पंडित जवाहरलाल नेहरु का जीवन परिचय,जीवनी,हिंदी, Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi

नाम – जवाहर लाल मोतीलाल नेहरू।

जन्म– चौदह नवंबर 1889 , इलाहाबाद,भारत ।

मृत्यु -27 मई1964 (उम्र 74 साल ) नई दिल्ली, भारत।

पिता – मोती लाल नेहरु ।

माता- स्वरूप रानी नेहरू।

विवाह – कमला नेहरू ।

उपलब्धियां

पंडित जवाहरलाल नेहरू असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भागीदार रहे , इलाहाबाद में 1924 नगर निगम अध्यक्ष चुने गए और शहर के प्रमुख कार्य अधिकारी के रूप में अपना योगदान दिया उसके बाद 1929 में कांग्रेस के  लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए आजादी की मांग का प्रस्ताव पारित किया और 1946 में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए बाद में स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने । पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले नेताओं में सबसे आगे रहे आजादी के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने पंडित जवाहर नेहरू को भारत के आधुनिक समय में भारत के निर्माता के रूप में जाना जाता है ।पंडित नेहरू को बच्चो से बहुत लगाव और प्रेम था इसलिए बच्चे उन्हें चाचा नेहरू बोला करते थे ।

प्रारंभिक जीवन

14 नवंबर 1889 को पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म हुआ ।इनके पिता मोतीलाल नेहरू एक प्रसिद्ध वकील इलाहाबाद में कार्यरत थे उनकी माता का नाम स्वरूपरानी था पंडित जवाहरलाल नेहरू मोतीलाल नेहरू के इकलौते उत्तराधिकारी थे पंडित नेहरू की तीन बहनें थीं और इनका परिवार कश्मीरी वंश में सारस्वत ब्राह्मण समाज का था ।
पंडित नेहरू ने अपनी शिक्षा दुनिया के सबसे अच्छे स्कूलों और कॉलेजों से ग्रहण की ।उन्होंने अपनी स्कूल की शिक्षा हैरो से की और ग्रेजुएशन कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी लॉ ऑफ कॉलेज से डिग्री पूरी की ।इंग्लैंड में रहकर वहां पर सात सालों मे पंडित नेहरू ने फैबियन समाजवाद और आयरिश राष्ट्रवाद के लिए तर्कसंगत सोच ओर दृष्टिकोण विकसित किया ।

करियर

1912 में पंडित नेहरू भारत लौट आएं और यहां वकालत की शुरुआत की ।1916 में नेहरू जी का विवाह कमला नेहरू से हुआ । 1917 में नेहरू होम रूल लीग से जुड़ गए ।राजनीत की असली शुरुआत 1919 में हुई जब पहली बार महात्मा गांधी के संपर्क में आए ।उस समय रॉलेट अधिनियम के खिलाफ महात्मा गांधी एक अभियान चला रहे थे ।उस समय गांधी के “सक्रिय और शांतिपूर्ण सविनय अवज्ञा आन्दोलन” के प्रति पंडित नेहरू अच्छे खासे प्रभावित हुए ।
पंडित जवहरलाल नेहरू में गांधी जी ने पहली बार स्वयं कल्पना करते हुए आशा की एक किरण और भारत का भविष्य देखा ।
नेहरू परिवार ने अपने आप को गांधी जी द्वारा दी गई दिक्षाओं के हिसाब से खुद को मजबूत किया और इसके साथ ही मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू ने पश्चिमी लिवास और महंगी चीज़ों के साथ महंगी सम्पत्ति का त्याग कर दिया ।वे अब एक गांधी टोपी और खादी कपड़े पहनने लगे । 1920-1922 में जवाहर लाल नेहरू ने असहयोग आन्दोलन में सक्रिय हिस्सा लिया और गिरफ्तार भी हुए लेकिन कुछ महीनों के पश्चात उन्हें रिहा कर दिया गया ।

1924 में जवाहर लाल नेहरु इलाहाबाद नगर निगम के चुनाव में अध्यक्ष चुने गए और उन्होंने दो वर्ष तक शहर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दी ।यहां का प्रशासनिक अनुभव उनके लिए मूल्यवान साबित हुआ जब वे देश के पहले प्रधानमंत्री बने ।पंडित नेहरू ने अपने कार्यकाल का सदुपयोग करते हुए स्वास्थ्य- सेवा , सार्वजनिक- शिक्षा और साफ- सफाई के विस्तार को मध्य नज़र रखते हुए काम किया ।ब्रिटिश सरकार का सहयोग न मिलने से उन्होंने 1926 में इस्तीफा दे दिया ।

पंडित नेहरू ने 1926-1928 तक महासचिव के रूप में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति में अपनी सेवाएं दी ।और वार्षिक सत्र का आयोजन मोतीलाल नेहरु की अध्यक्षता में किया गया
।इस सत्र के दौरान सुभाष चन्द्र बोस और जवाहर लाल नेहरू ने पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग का पक्ष रखा और समर्थन किया ।जबकि अन्य नेताओं के साथ मोतीलाल नेहरू ब्रिटिश सरकार के अंदर ही प्रभुत्व सम्पूर्ण राज्य चाहते थे ।इस मुद्दे को गंभीर रूप से सोचविचार कर हल करने के लिए महात्मा गांधी ने बीच का रास्ता दिखाते हुए कहा कि भारत के राज्य का दर्जा देने के लिए ब्रिटेन को “दो साल का समय” दिया जायेगा । ऐसा नहीं होने पर कांग्रेस के द्वारा पूर्ण रूप से “राजनैतिक स्वतंत्रता” के पक्ष में राष्ट्रीय आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा ।जब पंडित जवारहलाल नेहरू और सुभाष चन्द्र बोस ने ब्रिटिश सरकार से समय को कम से कम एक साल कर दिया जाए करने की मांग की तो सरकार की तरफ से कोई जबाव नहीं मिला ।
कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन 1929 दिसंबर , लाहौर में आयोजित हुआ जिसमें कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को चुना गया ।चुनाव के समय में नेहरूजी ने पार्टी के बाहर रहते हुए भी पार्टी के लिए ज़ोर शोर से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया । लगभग कांग्रेस ने हर प्रांत में सरकारों का गठन किया और केंद्रीय असेम्बली में राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की ।1936 और 1937 से लेकर 1946 में नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए ।और गांधी जी के साथ राष्ट्रव्यापी आंदोलन में सक्रिय रूप से दूसरे नंबर के नेता बन गए ।भारत छोड़ो आंदोलन के समय उन्हें 1942 में गिरफ्तार भी किया गया और बाद में 1945 में छोड़ दिया गया । भारत- पाकिस्तान- विभाजन के दौरान आज़ादी के मुद्दे पर ब्रिटिश सरकार के साथ हुए बातचीत में इन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

पंडित नेहरू भारत के पहले प्रधानमंत्री 1947 में बने । पाकिस्तान के साथ नए समझौते पर बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन और दंगे,भारतीय संघ में करीब करीब पांच सौ रियायतों का एकीकरण ,नए संविधान का निर्माण और निर्देशन,संसदीय लोकतंत्र कार्यप्रणाली के लिए राजनैतिक तथा प्रशासनिक ढांचे की स्थापन आदि विकट और चुनौतियों से भरे समय का सामना पंडित नेहरू ने प्रभावी तरीके से किया ।

भारत के विकास के लिए पंडित नेहरू का महत्वपूर्ण योगदान रहा ।इन्होनें योजना आयोग का गठन करते हुए साइंस और टेक्नोलॉजी के विकास को बढ़ावा दिया और तीन पंचवर्षीय योजनाओं का लगातार शुभारंभ किया ।देश में उनकी नीतियों के कारण कृषि और उद्योग से एक नए युग की शुरुआत हुई।भारत की विदेश नीति विकास में नेहरू जी ने मुख्य भूमिका निभाई । एशिया और अफ्रीका में उपनिवेशवाद के खात्मे के लिए पंडित नेहरू ने नासिर और टिटो के साथ मिलकर गुट निरपेक्ष आंदोलन की रचना रची ।पंडित नेहरू कोरियाई युद्ध का पतन करने और स्वेज नहर विवाद सुलझाने तथा कांगो समझौते के पक्ष में भारत की सेवाओं और इंटरनेशनल पुलिस व्यवस्था की पेशकश को मूर्तरूप देने जैसे विभिन्न इंटरनेशनल समस्याओं के समाधान में प्रमुख रूप से अपना योगदान दिया और मध्यस्थ भूमिका में रहे ।

लाओस, अस्ट्रिया,बर्लिन जैसे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान के लिए भी उनका योगदान पर्दे के पीछे रहकर भी सुझाव और सलाह के तौर पर महत्वपूर्ण रहा।

पंडित नेहरू चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के आपसी तालमेल और सम्बन्धों में सुधार नहीं कर पाए।चीन के साथ सीमा विवाद रास्ते के पत्थर साबित हुए और पाकिस्तान के एक समझौते पर आने के बाद कश्मीर मुद्दा सामने आया ।भारत पर चीन ने 1962 में हमला बोल दिया जिसका पूर्वानुमान लगाने में नेहरू असफल रहे ।ये वारदात उनके लिए एक बहुत बड़ी नाकामयाबी थी और उनकी मौत भी शायद इस असफलता के कारण हुई। पंडित जवाहलाल नेहरू की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से 27 मई 1964 को हुई।।

पंडित जवाहरलाल नेहरु की वीडियो में जीवनी देखे ।

Author: ARUN SANDHU

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2 thoughts on “पंडित जवाहरलाल नेहरु का जीवन परिचय,जीवनी,हिंदी, Biography of Jawaharlal Nehru in Hindi”

  1. बहोत खूब, काफी समय क्या पढ़ा जाए इस बात की दुविधा होती है। आपने बहुत ही सरल काम कर दिया हमारा ,ये ब्लोग लिखकर हमें भेजा वो भी भारत के महान व्यक्तियों के बारे में कुछ लिखकर अपनी सरल भाषा में जो जानकारी मिली उसी के साथ महान व्यक्तियों को दोबारा याद करवाया उसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

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